वाराणसी घाट एवं गंगा आरती संपूर्ण गाइड
माँ गंगा के अर्धचंद्राकार वक्र पर 7 किलोमीटर में फैले काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक 84 घाटों की विस्तृत यात्रा मार्गदर्शिका।
दशाश्वमेध एवं सायंकालीन महा गंगा आरती
प्रतिदिन गोधूलि वेला में (सर्दियों में शाम 6:00 बजे / गर्मियों में शाम 6:45 बजे), सात युवा अर्चकों द्वारा पीतल के बहुमंजिला दीपों, धूप और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य आरती की जाती है।
दशाश्वमेध घाटकेंद्रीय
वाराणसी का सबसे व्यस्त और विश्वविख्यात घाट, जो भव्य सायंकालीन महा गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है।
आरती समय: सूर्यास्त के समय (सर्दियों में शाम 6:00 बजे / गर्मियों में शाम 6:45 बजे)।
उत्तम दर्शन स्थल: सीढ़ियों पर आगे की पंक्ति (45 मिनट पहले पहुंचें) अथवा गंगा में बंधी नाव पर।
अस्सी घाटदक्षिणी छोर
सुबह-ए-बनारस सूर्योदय आरती, योगाभ्यास, शास्त्रीय संगीत और जीवंत रिवरफ्रंट कैफे के लिए प्रसिद्ध।
प्रातःकालीन समय: सूर्योदय से 45 मिनट पूर्व (प्रातः 5:00 से 6:30 बजे)।
प्रमुख आकर्षण: निशुल्क योग सत्र, तुलसीदास जी की तपोस्थली, पिज्जेरिया वाटिका कैफे।
मणिकर्णिका घाटमहाश्मशान घाट
काशी का मुख्य श्मशान घाट जहां मोक्षदायिनी चिता की अग्नि निरंतर प्रज्वलित रहती है। यह मोक्ष का प्रतीक है।
कड़ा नियम: दाह संस्कार की तस्वीरें या वीडियो लेना पूर्णतः वर्जित है।
सावधानी: गरीबों की लकड़ी के दान के नाम पर पैसे मांगने वाले दलालों से बचें।
सिंधिया एवं दरभंगा घाटधरोहर स्थापत्य
सिंधिया घाट पर जल में झुका हुआ प्राचीन शिव मंदिर और दरभंगा घाट पर राजसी बृजरामा पैलेस की भव्य प्राचीर।
उत्तम अनुभव: प्रातःकालीन नौका विहार अथवा शांत दोपहर की पैदल यात्रा के दौरान।
मानक नौका विहार किराया दरें (मोलभाव मार्गदर्शिका)
₹200 - ₹300 प्रति व्यक्ति (साझा) अथवा पूरी नाव ₹1,000 - ₹1,500 प्रति घंटा।
₹250 - ₹400 प्रति व्यक्ति पूरे 7 किमी राउंड ट्रिप हेतु (अस्सी से राजघाट)।
₹150 - ₹300 प्रति सीट आरती के दौरान बंधी नाव पर दर्शन हेतु।