Atmospheric sunset panoramic view of Varanasi riverfront ghats and Ganges river
VaranasiTravelGuide.com • आधिकारिक दृश्य यात्रा गाइड

वाराणसी (काशी)

"एक ऐसा शहर जिसे आप सिर्फ देखते नहीं, बल्कि अपनी आत्मा में अनुभव करते हैं।"

गंतव्य, आस्था, इतिहास, घुमावदार मार्ग, परिवहन साधन और दूरियों को एक सुगम एवं अविस्मरणीय दृश्य यात्रा में पिरोती काशी की संपूर्ण मार्गदर्शिका।

सभी दर्शनीय स्थल देखें
यात्रा पड़ाव (01 — 12)
01
पड़ाव 1 • GATEWAYवाराणसी यात्रा गाइड
Varanasi Junction Cantt Railway Station front view
Photo: Varanasi Travel Guide / Archive

वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन

वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन

"जहाँ से वाराणसी की आपकी यात्रा शुरू होती है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

वाराणसी जंक्शन (BSB), जिसे आमतौर पर वाराणसी कैंट भी कहा जाता है, शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन और काशी आने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख आगमन केंद्रों में से एक है। आप दुनिया के सबसे प्राचीन निरंतर बसे रहने वाले शहरों में से एक में प्रवेश कर रहे हैं—एक ऐसा शहर जिसका इतिहास दो हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है, फिर भी जिसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी आज भी उन्हीं नदी किनारे के घाटों, गलियों और पवित्र स्थलों के आसपास चलती है। स्टेशन से बाहर निकलते ही माहौल तेजी से बदल जाता है: ऑटो और ई-रिक्शा यात्रियों का इंतज़ार करते मिलते हैं, चाय की दुकानें अपनी रफ़्तार में चलती रहती हैं और सामने की सड़क गोडौलिया और पुराने शहर की ओर बढ़ती है। अधिकांश यात्रियों के लिए, वाराणसी को करीब से जानने की व्यावहारिक यात्रा यहीं से शुरू होती है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Established in 1862, BSB railway station played a central role in transforming Varanasi from a river-landlocked pilgrimage site into an accessible national cultural nexus.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताCantonment Area, Varanasi, UP 221002
उत्तम समय एवं दर्शन समय24 Hours (Best arrival windows: 6:00 AM – 9:00 AM or 4:00 PM – 7:00 PM)
प्रवेश शुल्क / पासFree station access (Platform ticket ₹10-₹50)
अनिवार्य अनुभव:Sip hot spiced Kulhad Chai at platform tea stalls before heading into the city center.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Ignore unauthorized 'hotel agents' offering cheap rooms near platforms. Book prepaid Auto-Rickshaws or Ola/Uber from designated stands outside Gate No. 1.
मार्ग परिवर्तन 1
4.2 किमी • 18 मिनट
प्रस्थान स्थान

वाराणसी जंक्शन (कैंट)

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री काल भैरव मंदिर

परिवहन साधन: ऑटो / रिक्शासमय: 18 मिनट

वाराणसी जंक्शन से कैंट रोड और कबीर चौरा होते हुए सड़क मार्ग से सीधे श्री काल भैरव मंदिर गलियारे की ओर जाएं।

ऑटो / रिक्शा
4.2 किमी
02
पड़ाव 2 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
Sacred entrance and brass bells of Shri Kaal Bhairav Temple in Varanasi
Photo: Kashi Shrine Archive

श्री काल भैरव मंदिर

श्री काल भैरव मंदिर

"काशी के कोतवाल, पवित्र नगरी के रक्षक।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

श्री काल भैरव मंदिर काशी के प्राचीन और अत्यंत श्रद्धेय मंदिरों में से एक है, जहाँ भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में उन्हें काशी का कोतवाल, अर्थात शहर का रक्षक, माना जाता है और मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने या यहाँ रहने के लिए उनकी अनुमति आवश्यक है। पुराने शहर की गलियों के बीच स्थित यह अपेक्षाकृत छोटा मंदिर अपनी आध्यात्मिक महत्ता के कारण बेहद खास है। गर्भगृह में काल भैरव का चाँदी से आच्छादित मुख दिखाई देता है और आसपास घंटियों, मंत्रोच्चार और निरंतर पूजा का वातावरण रहता है। श्रद्धालु यहाँ भैरव रक्षा सूत्र धारण करते हैं और सरसों का तेल, काले तिल और फूल अर्पित करते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Built in the mid-17th century, the temple holds deep significance in Tantric traditions and features a silver-faced idol of Lord Shiva holding a trident and accompanied by his vahana (dog).

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताVisheshwarganj, Varanasi, UP 221001 (4.2 km from Varanasi Junction)
उत्तम समय एवं दर्शन समय5:00 AM – 7:00 AM or 6:00 PM – 8:00 PM
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Receive a black sacred protection thread ('ganda') and peacock feather blessing from the temple priest.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Buy simple marigold flowers inside or at official stalls; ignore aggressive street vendors pushing forced expensive offerings.
मार्ग परिवर्तन 2
250 मीटर • 3 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री काल भैरव मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री महामृत्युंजय मंदिर

परिवहन साधन: पैदल यात्रासमय: 3 मिनट

काल भैरव मंदिर से उत्तर की ओर दारा नगर की ऐतिहासिक पारंपरिक गलियों से पैदल चलकर श्री महामृत्युंजय महादेव मंदिर पहुंचें।

पैदल यात्रा
250 मीटर
03
पड़ाव 3 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
Mahamrityunjay Mahadev Temple and Dhanvantari Koop in Varanasi.
Photo: Varanasi Heritage Trust

श्री महामृत्युंजय महादेव मंदिर

श्री महामृत्युंजय महादेव मंदिर

"जहाँ शिव को मृत्युंजय, मृत्यु पर विजय पाने वाले रूप में पूजा जाता है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

श्री महामृत्युंजय महादेव मंदिर दारानगर में स्थित काशी के श्रद्धेय शिव मंदिरों में से एक है, जहाँ भगवान शिव की पूजा मृत्युंजय—अर्थात मृत्यु पर विजय पाने वाले स्वरूप में की जाती है। मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में से एक धन्वंतरि कूप है, एक प्राचीन पवित्र कुआँ जिसके जल को धार्मिक मान्यता के अनुसार औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है और जिसे कई भूमिगत जलधाराओं से जुड़ा बताया जाता है। श्रद्धालु यहाँ महामृत्युंजय मंत्र का जाप और पूजा करके बीमारी, कष्ट और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यात्रियों के लिए यह काशी का एक अपेक्षाकृत शांत पक्ष दिखाता है—जहाँ सदियों पुरानी आस्था आज भी किसी संग्रहालय की कहानी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की पूजा का हिस्सा है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Mentioned in ancient Kashi Khanda scriptures, the temple is closely associated with Dhanvantari, the Vedic deity of Ayurveda and healing sciences.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताDara Nagar, Visheshwarganj, Varanasi, UP 221001 (250m walk from Kaal Bhairav Temple)
उत्तम समय एवं दर्शन समयMorning 6:00 AM – 9:00 AM for peaceful mantra chanting
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Listen to the rhythmic chanting of the Mahamrityunjay Mantra and sip a drop of holy water from the Dhanvantari Kup.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Access to the holy well is completely free; ignore unauthorized vendors trying to sell special well-water bottles.
मार्ग परिवर्तन 3
1.5 किमी • 10 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री महामृत्युंजय मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

परिवहन साधन: ऑटो / रिक्शासमय: 10 मिनट

महामृत्युंजय मंदिर से विशेषेश्वरगंज और गोदौलिया चौक होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रवेश द्वार की ओर जाएं।

ऑटो / रिक्शा
1.5 किमी
04
पड़ाव 4 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
grand Kashi Vishwanath Dham temple in Varanasi
Photo: Varanasi Travel Guide / Shrine Archive

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

"“द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शिरोमणि, काशी का स्वर्णिम हृदय...”"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहाँ भगवान शिव की पूजा विश्वनाथ या विश्वेश्वर के रूप में की जाती है—अर्थात् ‘ब्रह्मांड के स्वामी’। यह मंदिर प्राचीन काशी के हृदय में स्थित है, जहाँ सदियों पुरानी तीर्थ परंपरा आज भी गंगा की ओर जाती गलियों में जीवित है। दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद मंदिर तक पहुँच का अनुभव बड़े पैमाने पर बदल गया। मंदिर का जो क्षेत्र पहले लगभग 3,000 वर्ग फीट तक सीमित था, वह बढ़कर करीब 5 लाख वर्ग फीट के विस्तृत परिसर में बदल गया और मंदिर को सीधे गंगा से जोड़ा गया। आज यहाँ आने पर काशी के दो रूप एक साथ दिखाई देते हैं—आधुनिक तीर्थ परिसर का विशाल विस्तार और सदियों पुरानी उस आस्था का निजी अनुभव, जिसके केंद्र में भगवान विश्वनाथ का दर्शन है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Rebuilt by Maharani Ahilyabai Holkar of Indore in 1780 after historical destruction, the temple's 15.5-meter spire was plated with pure gold donated by Maharaja Ranjit Singh of Punjab in 1835.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताLahori Tola, Varanasi, UP 221001
उत्तम समय एवं दर्शन समयEarly Morning Mangala Aarti (3:00 AM - 4:00 AM) or late afternoon (3:30 PM - 5:00 PM)
प्रवेश शुल्क / पासFree General Darshan; Sugam Darshan ticket available online for ₹300 per person.
अनिवार्य अनुभव:Walk through the newly built Vishwanath Corridor down to Lalita Ghat to witness the golden temple reflection.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:No mobile phones, cameras, smartwatches, leather belts, or large bags are permitted inside. Use official free lockers provided by the Temple Trust at Gate No. 4.
आधिकारिक आरती एवं सुगम दर्शन पास: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक पोर्टल पर सीधे बुकिंग करें।
बुकिंग हेतु आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
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मार्ग परिवर्तन 4
650 मीटर • 8 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

दशाश्वमेध घाट

परिवहन साधन: पैदल यात्रासमय: 8 मिनट

पीतल के बर्तनों, पूजा सामग्री और बनारसी साड़ियों की जीवंत विश्वनाथ गली से पैदल होते हुए दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों पर उतरें।

पैदल यात्रा
650 मीटर
05
पड़ाव 5 • GHATवाराणसी यात्रा गाइड
Priests holding brass lamps during the Ganga Aarti at Dashashwamedh Ghat, Varanasi.
Photo: Varanasi Travel Guide / Ganges Media

दशाश्वमेध घाट

दशाश्वमेध घाट

"जहाँ संध्या ढलते ही गंगा आरती से नदी किनारा जीवंत हो उठता है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

दशाश्वमेध घाट वाराणसी का सबसे प्रमुख नदी किनारा है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है और शहर की भव्य संध्या गंगा आरती का मुख्य स्थल है। शाम ढलते ही ऊँचे मंचों पर पुजारी पीतल के दीप, धूप, फूल और शंख के साथ आरती करते हैं, जबकि घंटियों और मंत्रों की आवाज़ गंगा के पार तक सुनाई देती है। यह अनुष्ठान लगभग 45 मिनट चलता है, लेकिन दशाश्वमेध घाट केवल शाम की आरती तक सीमित नहीं है। दिन में यहाँ श्रद्धालु गंगा में स्नान और पूजा करते हैं, नावें नदी के किनारे चलती रहती हैं और घाट की सीढ़ियों पर काशी की रोज़मर्रा की हलचल दिखाई देती है। पहली बार आने वाले यात्रियों के लिए यह उन जगहों में से एक है जहाँ काशी की आस्था और रोज़मर्रा की ज़िंदगी एक ही जगह साथ दिखाई देती है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Reconstructed by Peshwa Balaji Baji Rao in 1748, this ghat has been the principal public ceremonial center of Varanasi for over three centuries.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताGodowlia, Varanasi, UP 221001
उत्तम समय एवं दर्शन समय6:00 PM to 7:30 PM for Evening Ganga Aarti (Arrive by 5:30 PM for good steps/boat seating)
प्रवेश शुल्क / पासFree to view from the ghat steps; Boat seating ranges from ₹100 to ₹300 per seat.
अनिवार्य अनुभव:Watch the Ganga Aarti from a wooden rowboat anchored on the Ganges River for a breathtaking panoramic perspective.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Beware of priests demanding forced donations for 'special pujas' or offering fake vip seats on steps. Negotiate boat prices firmly before stepping on board.
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मार्ग परिवर्तन 5
1.1 किमी • 12 मिनट
प्रस्थान स्थान

दशाश्वमेध घाट

अगला गंतव्य पड़ाव

मणिकर्णिका घाट

परिवहन साधन: नाव (बोट)समय: 12 मिनट

राजेंद्र प्रसाद घाट, मान मंदिर घाट और त्रिपुरा भैरवी घाट को निहारते हुए उत्तर दिशा की ओर लकड़ी की नौका से मणिकर्णिका पहुंचें।

नाव (बोट)
1.1 किमी
06
पड़ाव 6 • GHATवाराणसी यात्रा गाइड
Drone view of Manikarnika Ghat in Varanasi
Photo: Varanasi Travel Guide / Heritage File

मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट

"काशी का महाश्मशान, जहाँ दिन-रात अंतिम संस्कार होते हैं।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

मणिकर्णिका घाट, जिसे पारंपरिक रूप से महाश्मशान या ‘महान श्मशान भूमि’ कहा जाता है, वाराणसी के उन पवित्र स्थलों में से एक है जहाँ हिंदू अंतिम संस्कार की परंपरा सदियों से जुड़ी रही है। यहाँ दिन-रात अंतिम संस्कार होते हैं और हिंदू मान्यता के अनुसार काशी में अंतिम संस्कार होने से मोक्ष, यानी जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति, प्राप्त हो सकती है। यह कोई प्रदर्शन या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आज भी सक्रिय धार्मिक स्थल है जहाँ परिवार अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की विधि पूरी करते हैं। यात्रियों के लिए मणिकर्णिका को समझने का सही तरीका दूरी और मौन के साथ इसे देखना है—एक ऐसी जीवित परंपरा के रूप में, जिसे दिखावे के लिए नहीं बल्कि आस्था और अंतिम संस्कार के लिए निभाया जाता है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Mentioned in the 5th-century Gupta inscriptions and Puranas, it contains the Manikarnika Kund, a holy pond believed to have been carved by Lord Vishnu.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताNear Scindia Ghat, Varanasi, UP 221001
उत्तम समय एवं दर्शन समयBest viewed respectfully from a passing riverboat during early morning or late evening.
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Observe silently from a respectful distance or from a boat on the river to contemplate life, mortality, and liberation.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:STRICT WARNING: Photography of funeral pyres is strictly forbidden out of respect. Beware of scammers asking for 'wood donations for poor families'—this is a well-known scam.
मार्ग परिवर्तन 6
3.2 किमी • 25 मिनट
प्रस्थान स्थान

मणिकर्णिका घाट

अगला गंतव्य पड़ाव

अस्सी घाट

परिवहन साधन: नाव (बोट)समय: 25 मिनट

दरभंगा घाट, चेत सिंह किला और केदार घाट सहित 50 से अधिक ऐतिहासिक घाटों को पार करते हुए दक्षिण की ओर नौका यात्रा।

नाव (बोट)
3.2 किमी
07
पड़ाव 7 • GHATवाराणसी यात्रा गाइड
Dawn sky over Assi Ghat during Subah-e-Banaras in Varanasi.
Photo: Varanasi Travel Guide / Dawn Series

अस्सी घाट

अस्सी घाट

"जहाँ काशी की सुबह प्रार्थना, संगीत और सूर्योदय के साथ शुरू होती है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

अस्सी घाट वाराणसी के दक्षिणी छोर पर स्थित है, जहाँ अस्सी नदी गंगा से मिलती है। यह सुबह-ए-बनारस के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहाँ सूर्योदय के समय वैदिक मंत्रोच्चार, शास्त्रीय संगीत, योग और प्रार्थना के साथ दिन की शुरुआत होती है। दिन बढ़ने के साथ घाट का माहौल अधिक सहज हो जाता है—यहाँ श्रद्धालु और स्थानीय लोग सीढ़ियों पर आते-जाते हैं, छात्र और यात्री आसपास के कैफ़े और गेस्टहाउस में समय बिताते हैं और गंगा पर नावें धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहती हैं। केंद्रीय घाटों की भीड़ से अलग, अस्सी काशी का एक ऐसा रूप दिखाता है जहाँ आप पूजा के साथ सुबह शुरू कर सकते हैं, नदी के किनारे ठहर सकते हैं और शहर को धीरे-धीरे जागते हुए देख सकते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Associated with the great poet-saint Goswami Tulsidas, who wrote parts of the epic Ramcharitmanas at a cave near Assi Ghat around 1575 AD.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताShivala, Varanasi, UP 221005
उत्तम समय एवं दर्शन समय5:00 AM for Subah-e-Banaras morning aarti & yoga; or late evening for bohemian cafes
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Attend morning Subah-e-Banaras at 5:30 AM, try fresh apple pie at nearby Pizzeria Vaatika, and rent a hand-paddled boat.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Great starting point for long sunrise heritage walks connecting all 84 ghats northwards to Dashashwamedh Ghat.
मार्ग परिवर्तन 7
1.2 किमी • 5 मिनट
प्रस्थान स्थान

अस्सी घाट

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री तुलसी मानस मंदिर

परिवहन साधन: ई-रिक्शासमय: 5 मिनट

अस्सी घाट से दुर्गाकुंड रोड होते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा में ई-रिक्शा द्वारा श्री तुलसी मानस मंदिर पहुंचें।

ई-रिक्शा
1.2 किमी
08
पड़ाव 8 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
Inside view of Shri Tulsi Manas temple in Varanasi
Photo: Varanasi Shrine Archive

श्री तुलसी मानस मंदिर

श्री तुलसी मानस मंदिर

"जहाँ रामचरितमानस संगमरमर में जीवंत दिखाई देता है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

श्री तुलसी मानस मंदिर वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित भगवान राम को समर्पित एक मंदिर है, जिसका निर्माण 1964 में उस स्थान पर किया गया था जो गोस्वामी तुलसीदास और उनकी रामभक्ति से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा माना जाता है। इसकी सबसे खास विशेषता मंदिर की सफेद संगमरमर की दीवारें हैं, जिन पर रामचरितमानस के छंद अंकित हैं—यानी इस महाकाव्य को आप केवल पढ़ते नहीं, मंदिर के भीतर चलते हुए उसे दीवारों पर भी देख सकते हैं। मंदिर की ऊपरी दीर्घाओं में रामायण से जुड़े दृश्य और प्रतिमाएँ भी दिखाई देती हैं, जबकि आसपास के बगीचे परिसर को वाराणसी के अधिक भीड़भाड़ वाले तीर्थ स्थलों से अलग शांत वातावरण देते हैं। यात्रियों के लिए यह ऐसी जगह है जहाँ साहित्य, भक्ति और स्थापत्य एक साथ दिखाई देते हैं—मानो रामचरितमानस को एक मंदिर के रूप में सामने ला दिया गया हो।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Constructed by the Sureka family of Kolkata, this temple commemorates Tulsidas rendering the Sanskrit Ramayana into Avadhi Hindi, making the sacred epic accessible to ordinary people.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताDurgakund Road, Near Durga Kund, Varanasi, UP 221005
उत्तम समय एवं दर्शन समयMorning 6:00 AM – 10:00 AM or Evening 5:00 PM – 8:00 PM
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Walk around the inner marble hall to read the engraved Avadhi Ramcharitmanas chaupais on the walls.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Enjoy the peaceful garden and mechanical Ramayana puppets on the upper floor for a small token fee.
मार्ग परिवर्तन 8
150 मीटर • 2 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री तुलसी मानस मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री दुर्गा मंदिर

परिवहन साधन: पैदल यात्रासमय: 2 मिनट

तुलसी मानस मंदिर से दुर्गाकुंड मार्ग पर मात्र 150 मीटर आगे चलकर ऐतिहासिक लाल बलुआ पत्थर के दुर्गा मंदिर पहुंचें।

पैदल यात्रा
150 मीटर
09
पड़ाव 9 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
Multi-tiered red shikhara of Durga Mata Temple beside Durga Kund, Varanasi.
Photo: Varanasi Heritage Trust

श्री दुर्गा मंदिर (दुर्गा कुंड)

श्री दुर्गा मंदिर (दुर्गा कुंड)

"जहाँ पवित्र दुर्गाकुंड के किनारे लाल रंग का भव्य दुर्गा मंदिर है।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

श्री दुर्गा मंदिर, जिसे दुर्गाकुंड मंदिर भी कहा जाता है, 18वीं शताब्दी का देवी दुर्गा को समर्पित मंदिर है और दक्षिणी वाराणसी के सबसे अलग दिखाई देने वाले प्रमुख मंदिरों में से एक है। इसका गहरा लाल बाहरी स्वरूप और कई स्तरों वाला नागर शैली का शिखर मंदिर के ठीक पास स्थित पवित्र आयताकार दुर्गाकुंड के साथ इसकी पहचान बनाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता है कि यहाँ स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा स्वयंभू है, यानी इसे मनुष्य ने बनाया नहीं बल्कि यह स्वयं प्रकट हुई मानी जाती है। मंदिर का लाल रंग, पत्थर की कारीगरी और उसके किनारे स्थित कुंड इसे काशी के दूसरे बड़े तीर्थ परिसरों से एक अलग अनुभव देते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Built in the 18th century by Rani Bhabani of Natore (Bengal), the temple exemplifies royal North Indian temple craftsmanship and remains a primary center for Goddess worship in Kashi.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताDurgakund Road, Jawahar Nagar, Varanasi, UP 221005
उत्तम समय एवं दर्शन समयMorning 6:00 AM – 9:00 AM or during Navratri festivities
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Ring the heavy temple bell and admire the reflection of the multi-tiered red spire in the waters of Durga Kund.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Keep food items, spectacles, and bags secured inside your pockets as monkeys are active around the temple pond.
मार्ग परिवर्तन 9
600 मीटर • 7 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री दुर्गा मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

श्री संकट मोचन मंदिर

परिवहन साधन: ऑटो / रिक्शासमय: 7 मिनट

दुर्गा मंदिर से संकट मोचन रोड होते हुए 600 मीटर आगे श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर के शांत हरित प्रांगण में प्रवेश करें।

ऑटो / रिक्शा
600 मीटर
10
पड़ाव 10 • TEMPLEवाराणसी यात्रा गाइड
Front view of Shri Sankat Mochan temple in Varanasi
Photo: Kashi Shrine Archive

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर

"गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित हनुमान मंदिर।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी के प्रमुख श्रद्धेय हनुमान मंदिरों में से एक है और इसका संबंध गोस्वामी तुलसीदास से माना जाता है, जिन्होंने 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में इस मंदिर की स्थापना की थी। ‘संकट मोचन’ का अर्थ मुसीबतों से मुक्ति दिलाने वाला है, इसलिए श्रद्धालु यहाँ प्रार्थना करते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और मिठाई, फूल तथा दीप अर्पित करते हैं। गर्भगृह में हनुमान जी की प्रतिमा पर परंपरागत रूप से सिंदूर और गेंदे के फूल चढ़ाए जाते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को यहाँ विशेष रूप से अधिक श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर की एक खास पहचान इसका सांस्कृतिक पक्ष भी है—यहाँ होने वाला वार्षिक संकट मोचन संगीत समारोह शास्त्रीय संगीत और नृत्य को मंदिर की भक्ति परंपरा के साथ जोड़ता है।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Founded by Goswami Tulsidas, the temple is one of the most revered Hanuman shrines in India and hosts the famous annual Sankat Mochan Sangeet Samaroh classical music festival.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताSankat Mochan Road, Saket Nagar, Nagwa, Varanasi, UP 221005
उत्तम समय एवं दर्शन समयTuesday & Saturday mornings for vibrant devotion, or late evening Aarti
प्रवेश शुल्क / पासFree
अनिवार्य अनुभव:Chant the Hanuman Chalisa with fellow devotees and purchase hot pure ghee Besan Ladoo prasad from the official counter.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Mobile phones, cameras, smartwatches, and electronic gadgets are strictly banned inside. Use official free security counters to deposit devices.
मार्ग परिवर्तन 10
14.5 किमी • 40 मिनट
प्रस्थान स्थान

श्री संकट मोचन मंदिर

अगला गंतव्य पड़ाव

सारनाथ धमेख स्तूप

परिवहन साधन: टैक्सी / कैबसमय: 40 मिनट

वाराणसी बाईपास मार्ग से उत्तर की ओर ड्राइव करते हुए भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ पुरातत्व पार्क पहुंचें।

टैक्सी / कैब
14.5 किमी
11
पड़ाव 11 • SARNATHवाराणसी यात्रा गाइड
Dhamek Stupa rising above the green archaeological grounds at Sarnath.
Photo: Varanasi Travel Guide / Archaeological Collection

सारनाथ धमेख स्तूप

सारनाथ धमेख स्तूप

"जहाँ बुद्ध ने पहली बार धर्मचक्र प्रवर्तन किया।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

सारनाथ का धमेख स्तूप वाराणसी से लगभग 10 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। यही वह हिरण उद्यान है जहाँ ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया और धर्मचक्र प्रवर्तन किया। वर्तमान धमेख स्तूप लगभग 43.6 मीटर ऊँचा है और इसके निचले हिस्से में पत्थर पर बारीक नक्काशी दिखाई देती है, जबकि इसके आसपास प्राचीन विहारों और अन्य बौद्ध अवशेषों का विस्तृत पुरातात्विक परिसर है। सारनाथ का एक और असाधारण संबंध आधुनिक भारत से है—यहाँ मिला अशोक का प्रसिद्ध सिंह स्तंभ-शीर्ष, जिसे आज भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का आधार माना जाता है, पास के सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित है। यात्रियों के लिए सारनाथ सिर्फ एक प्राचीन स्मारक देखने की जगह नहीं है; यह वह भूमि है जहाँ से बुद्ध की शिक्षाएँ पहली बार व्यापक रूप से फैलने लगीं।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Constructed by Emperor Ashoka in 249 BC and expanded in 500 AD during the Gupta Empire, Sarnath remains a monument to world peace and spiritual heritage.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताSarnath, Varanasi, UP 221007
उत्तम समय एवं दर्शन समयMorning between 8:00 AM and 11:00 AM or late afternoon (Cooler temperatures for garden walks)
प्रवेश शुल्क / पास₹25 for Indian nationals; ₹300 for foreign tourists.
अनिवार्य अनुभव:Sit quietly in the manicured gardens surrounding Dhamek Stupa and visit the Lion Capital in the Sarnath Museum.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Hire an official ASI licensed guide at the museum gate to properly understand the complex script sculptures.
मार्ग परिवर्तन 11
14.2 किमी • 40 मिनट
प्रस्थान स्थान

सारनाथ

अगला गंतव्य पड़ाव

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU)

परिवहन साधन: ई-रिक्शा / टैक्सीसमय: 40 मिनट

गाजीपुर हाईवे से दक्षिण की ओर लौटते हुए मालवीय पुल पार कर बीएचयू के भव्य लंका प्रवेश द्वार में प्रवेश करें।

ई-रिक्शा / टैक्सी
14.2 किमी
12
पड़ाव 12 • UNIVERSITYवाराणसी यात्रा गाइड
Drone view of Banaras Hindu University Main Gate, Varanasi
Photo: Varanasi Travel Guide / Campus File

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

"एक विशाल हरित परिसर जहाँ शिक्षा, कला और आस्था साथ मिलती हैं।"

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना 1916 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी और आज यह वाराणसी के सबसे अलग बड़े परिसरों में से एक है। इसका मुख्य परिसर लगभग 1,300 एकड़ में फैला है, जहाँ पेड़ों से घिरी सड़कें, भव्य इमारतें और शिक्षा, संस्कृति तथा आस्था से जुड़े कई प्रमुख स्थल हैं। परिसर के केंद्र में स्थित नया विश्वनाथ मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसका शिखर लगभग 77 मीटर ऊँचा है, जबकि भारत कला भवन की दीर्घाओं में लगभग एक लाख प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियाँ तथा पुरावशेष संग्रहित हैं। यात्रियों के लिए BHU सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि शहर के भीतर बसा एक अलग संसार है—जहाँ छात्र जीवन, ज्ञान, कला और आस्था आज भी साथ-साथ दिखाई देते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर:

ऐतिहासिक धरोहर: Established during the Indian independence movement as a center for modern scientific education integrated with traditional Indian philosophy.

यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी

स्थान / पताLanka, Varanasi, UP 221005
उत्तम समय एवं दर्शन समयLate afternoon (3:00 PM – 6:00 PM) for peaceful walks and evening cold coffee at VT
प्रवेश शुल्क / पासFree campus and temple entry; Bharat Kala Bhavan museum ₹20.
अनिवार्य अनुभव:Try cold coffee with ice cream at VT canteen and explore Indian miniature paintings at Bharat Kala Bhavan.
सावधानी एवं स्थानीय सलाह:Rent an e-rickshaw inside Lanka Gate to comfortably tour the vast 1,300-acre campus grounds.
मार्ग परिवर्तन 12
8.5 किमी • 25 मिनट
प्रस्थान स्थान

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU)

अगला गंतव्य पड़ाव

वाराणसी जंक्शन (कैंट)

परिवहन साधन: टैक्सी / कैबसमय: 25 मिनट

बीएचयू लंका गेट से कैंट रोड होते हुए वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन लौटकर अपनी पावन काशी तीर्थयात्रा को पूर्ण करें।

टैक्सी / कैब
8.5 किमी
ॐ
शुभ यात्रा • सुखद एवं सुरक्षित यात्रा
ॐ

अलविदा, प्रिय यात्री!

वाराणसी जंक्शन से आरंभ होकर प्राचीन घाटों, पावन मंदिर गलियारों, शांत सारनाथ तपोस्थली और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तक की आपकी यह पवित्र यात्रा अब आपको सकुशल प्रस्थान की ओर ले जाती है।

“माँ गंगा की पावन शांति और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद आपके हृदय में सदैव बना रहे। बनारस की यह आध्यात्मिक ज्योति आपके हर कदम को प्रकाशित करे।”

— हर हर महादेव! 🙏
अंतिम पड़ाव: वाराणसी जंक्शन (कैंट) • यात्रा संपन्न